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Related Party Transactions

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संबंधित पक्ष लेनदेन

1. प्रस्तावना

 

संबंधित पक्ष लेन-देन (Related Party Transactions) संभावित या वास्तविक हितों के टकराव (Conflict of Interest) की स्थिति उत्पन्न कर सकते हैं, जो कंपनी तथा उसके शेयरधारकों के सर्वोत्तम हितों के विरुद्ध हो सकते हैं। कंपनी अधिनियम, 2013 ("अधिनियम") तथा उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के अनुसार संबंधित पक्ष लेन-देन की स्वीकृति से संबंधित आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, शुभम हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कंपनी लिमिटेड के निदेशक मंडल ने संबंधित पक्ष लेन-देन पर यह नीति तैयार की है। यह नीति कंपनी की लेखा परीक्षा समिति (Audit Committee) की सिफारिशों के आधार पर निदेशक मंडल द्वारा अपनाई गई है। 

अधिनियम की धारा 177(4) के अनुसार, कंपनी द्वारा संबंधित पक्षों के साथ किए जाने वाले लेन-देन अथवा उनमें किए जाने वाले किसी भी बाद के संशोधन को लेखा परीक्षा समिति (Audit Committee) द्वारा अनुमोदित किया जाना आवश्यक है। 

अधिनियम की धारा 188 के अंतर्गत आने वाले सभी संबंधित पक्ष लेन-देन, जो कंपनी के सामान्य व्यवसाय के दौरान नहीं किए गए हों और/या आर्म्स लेंथ (Arms' Length) के आधार पर न हों, उनके लिए निदेशक मंडल की पूर्व स्वीकृति आवश्यक है। यदि ऐसे लेन-देन अधिनियम के अंतर्गत निर्धारित सीमा (Threshold Limits) से अधिक होते हैं, तो उनके लिए कंपनी के शेयरधारकों की स्वीकृति भी आवश्यक होगी। जिन संबंधित पक्षों के साथ ऐसा लेन-देन किया जा रहा है, वे ऐसे प्रस्तावों पर मतदान से स्वयं को अलग रखेंगे।

 

इसके अतिरिक्त, अधिनियम के अनुसार निर्दिष्ट संबंधित पक्ष लेन-देन का विवरण निदेशक मंडल की रिपोर्ट (Board's Report) में, ऐसे लेन-देन करने के औचित्य (Justification) सहित प्रकाशित किया जाना आवश्यक है। 

राष्ट्रीय आवास बैंक (National Housing Bank - NHB) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या NHB.HFC.CG-DIR.1/MD&CEO/2016 दिनांक 9 फरवरी 2017, जिसे परिपत्र संख्या NHB (ND)/DRS/Policy Circular No.79/2016-17 दिनांक 27 अप्रैल 2017 के साथ पढ़ा जाएगा, जिसके माध्यम से हाउसिंग फाइनेंस कंपनियाँ – कॉर्पोरेट गवर्नेंस (राष्ट्रीय आवास बैंक) निर्देश, 2016 अधिसूचित किए गए हैं, के अनुसार कंपनी को संबंधित पक्ष लेन-देन से संबंधित अपनी नीति को अपनी वेबसाइट तथा अपनी वार्षिक रिपोर्ट (Annual Report) में प्रकाशित करना आवश्यक होगा।

 

2. नीति का उद्देश्य

 

इस नीति का उद्देश्य निम्नलिखित निर्धारित करना है: (क) संबंधित पक्ष लेन-देन (Related Party Transactions) के लिए महत्व (Materiality) की सीमाएँ (Thresholds); (ख) अधिनियम तथा कंपनी पर समय-समय पर लागू अन्य सभी प्रासंगिक कानूनों एवं विनियमों के आधार पर कंपनी और उसके संबंधित पक्षों के बीच होने वाले लेन-देन के संचालन एवं प्रबंधन की प्रक्रिया; तथा (ग) ऐसे लेन-देन के लिए उचित अनुमोदन (Approval), प्रकटीकरण (Disclosure) एवं रिपोर्टिंग (Reporting) सुनिश्चित करने हेतु मार्गदर्शक सिद्धांत एवं तंत्र (Mechanism) निर्धारित करना, जिससे कंपनी एवं उसके हितधारकों (Stakeholders) के सर्वोत्तम हितों की रक्षा की जा सके। 

3. प्रयोज्यता एवं विधिक ढांचा

 

यह नीति कंपनी द्वारा अपने संबंधित पक्षों (Related Parties) के साथ किए जाने वाले सभी लेन-देन पर लागू होगी तथा इसका संचालन कंपनी अधिनियम, 2013, उसके अंतर्गत समय-समय पर प्रभावी नियमों, राष्ट्रीय आवास बैंक (NHB) द्वारा जारी लागू विनियमों तथा इस संबंध में लागू अन्य वैधानिक (Statutory) कानूनों के अनुसार किया जाएगा।इस नीति में किसी भी वैधानिक प्रावधान (Statutory Provision) का उल्लेख, समय-समय पर उसमें किए गए संशोधनों (Amendments), पुनः अधिनियमन (Re-enactment) अथवा अन्य वैधानिक प्रावधानों द्वारा किए गए परिवर्तनों (चाहे वे इस नीति की तिथि से पहले किए गए हों या बाद में) के संदर्भ में माना जाएगा। इसमें ऐसे सभी प्रावधान भी सम्मिलित होंगे जो मूल प्रावधानों का पुनः अधिनियमन (चाहे संशोधन सहित या बिना संशोधन के) हों।

4. परिभाषाएँ

 

इस नीति के प्रयोजनार्थ निम्नलिखित शब्दों एवं अभिव्यक्तियों के अर्थ, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, निम्नानुसार होंगे:

 

"अधिनियम (Act)" से अभिप्राय कंपनी अधिनियम, 2013 तथा उसमें समय-समय पर किए गए संशोधनों या परिवर्तनों से है।

"आर्म्स लेंथ आधार (Arm's Length Basis)" से अभिप्राय दो संबंधित पक्षों के बीच ऐसे लेन-देन से है, जिसे इस प्रकार किया गया हो मानो वे परस्पर असंबंधित (Unrelated) हों, ताकि किसी प्रकार का हितों का टकराव (Conflict of Interest) न हो। [अधिनियम की धारा 188(1) के स्पष्टीकरण (ख) के अनुसार]।


"लेखा परीक्षा समिति (Audit Committee)" से अभिप्राय अधिनियम की धारा 177 के अनुसार कंपनी के निदेशक मंडल द्वारा गठित लेखा परीक्षा समिति से है।


  • "निदेशक मंडल (Board of Directors)" अथवा "बोर्ड (Board)" से अभिप्राय SHDFC के निदेशक मंडल से है, जैसा कि समय-समय पर गठित किया गया हो।

  • "कंपनी" अथवा "SHDFC" से अभिप्राय शुभम हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कंपनी लिमिटेड से है।

  • "नियंत्रण (Control)" का वही अर्थ होगा जो अधिनियम में परिभाषित किया गया है।

  • "प्रमुख प्रबंधकीय कार्मिक (Key Managerial Personnel - KMP)" का अर्थ वही होगा जो अधिनियम में परिभाषित किया गया है।

  • "सामूहिक पूर्व-अनुमोदन (Omnibus Approval)" से अभिप्राय इस नीति में निर्धारित शर्तों के अनुपालन के अधीन लेखा परीक्षा समिति द्वारा प्रदान की गई एकमुश्त पूर्व-अनुमोदन (Blanket Pre-Approval) से है।"व्यवसाय के सामान्य क्रम (Ordinary Course of Business)" में वे सभी सामान्य लेन-देन, परंपराएँ एवं व्यावसायिक प्रथाएँ शामिल होंगी, जिन्हें कंपनी अपने नियमित व्यवसाय एवं गतिविधियों के संचालन हेतु अपनाती है, तथा वे सभी कार्यकलाप जो कंपनी अपने मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (Memorandum of Association) एवं आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (Articles of Association) के अनुसार कर सकती है।

  • "संबंधित पक्ष (Related Party)"
    , इस नीति के प्रयोजन हेतु, कंपनी के संदर्भ में वही होगा जिसका अर्थ अधिनियम की धारा 2(76) में परिभाषित किया गया है।
    "संबंधित पक्ष लेन-देन (Related Party Transaction)" से अभिप्राय अधिनियम की धारा 188 की उपधारा (1) के खंड (क) से (ग) में निर्दिष्ट लेन-देन से है।

    किसी
    संबंधित पक्ष (Related Party) के साथ किया गया "लेन-देन (Transaction)" एकल लेन-देन अथवा किसी अनुबंध (Contract) के अंतर्गत किए गए लेन-देन के समूह (Group of Transactions) दोनों को सम्मिलित करेगा।

 

इस नीति में जिन शब्दों को परिभाषित नहीं किया गया है, उनका वही अर्थ होगा जो कंपनी अधिनियम, 2013 अथवा अन्य लागू कानूनों या विनियमों में निर्धारित किया गया है।

 

5. संबंधित पक्ष लेन-देन (Related Party Transactions) पर नीति

 

लेखा परीक्षा समिति (Audit Committee) इस नीति की समय-समय पर, अपनी आवश्यकतानुसार समीक्षा करेगी तथा आवश्यकता होने पर इस नीति में संशोधन के लिए निदेशक मंडल (Board) को सिफारिश कर सकती है|

सभी संबंधित पक्ष लेन-देन (Related Party Transactions), उन्हें किए जाने से पूर्व, इस नीति के अनुसार अनुमोदन प्राप्त करने हेतु लेखा परीक्षा समिति के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।

जिन मामलों में किसी अनजाने में हुई त्रुटि (Inadvertent Omission) अथवा अप्रत्याशित परिस्थितियों (Unforeseen Circumstances) के कारण पूर्व अनुमोदन प्राप्त नहीं किया जा सका हो, ऐसे मामलों में लेखा परीक्षा समिति इस नीति के अनुसार उन लेन-देन का पश्चात् अनुमोदन (Ratification) कर सकती है।

 

5.1 संभावित संबंधित पक्षों एवं लेन-देन की पहचान


प्रत्येक निदेशक (Director) यह सुनिश्चित करेगा कि वह कंपनी द्वारा समय-समय पर निर्धारित प्रारूप में निम्नलिखित जानकारी का घोषणा-पत्र (Declaration) कंपनी सचिव (Company Secretary) को प्रतिवर्ष, अधिमानतः वित्तीय वर्ष के प्रारंभ की पहली बोर्ड बैठक में, तथा जब भी पूर्व में दी गई जानकारी में कोई परिवर्तन हो, उपलब्ध कराए: 

  • a.) उसके/उसकी रिश्तेदारों (Relatives) के नाम।
  • b.) ऐसी साझेदारी फर्में (Partnership Firms) जिनमें वह स्वयं अथवा उसका/उसकी कोई रिश्तेदार भागीदार (Partner) हो।
  • c.) ऐसी निजी कंपनियाँ (Private Companies) जिनमें वह स्वयं अथवा उसका/उसकी कोई रिश्तेदार सदस्य (Member) या निदेशक (Director) हो।
  • d.) ऐसी सार्वजनिक कंपनियाँ (Public Companies) जिनमें वह निदेशक हो तथा स्वयं एवं अपने रिश्तेदारों के साथ मिलकर कंपनी की चुकता शेयर पूंजी (Paid-up Share Capital) का 2% से अधिक हिस्सा धारित करता/करती हो।
    • e.) कोई भी निगमित निकाय (Body Corporate), जिसका निदेशक मंडल (Board of Directors), प्रबंध निदेशक (Managing Director) अथवा प्रबंधक (Manager), उसकी सलाह, निर्देश या आदेशों के अनुसार कार्य करने का अभ्यस्त हो, बशर्ते कि ऐसी सलाह, निर्देश या आदेश उसकी पेशेवर क्षमता (Professional Capacity) में न दिए गए हों।
  • f.) ऐसे व्यक्तियों का विवरण, जिनकी सलाह, निर्देश या आदेशों के अनुसार वह कार्य करने का अभ्यस्त हो, बशर्ते कि ऐसी सलाह, निर्देश या आदेश किसी व्यक्ति से उसकी पेशेवर क्षमता (Professional Capacity) में प्राप्त न किए गए हों।

 

प्रत्येक निदेशक (Director) यह सुनिश्चित करेगा कि किसी भी संभावित संबंधित पक्ष लेन-देन (Related Party Transaction) की सूचना कंपनी सचिव (Company Secretary) को समय पर प्रदान की जाए। इस सूचना में लेन-देन से संबंधित वह सभी अतिरिक्त जानकारी भी शामिल होगी जिसकी मांग निदेशक मंडल (Board) अथवा लेखा परीक्षा समिति (Audit Committee) द्वारा की जाए, ताकि उक्त विषय को लेखा परीक्षा समिति एवं निदेशक मंडल के समक्ष अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किया जा सके। 

यह भी प्रावधानित है कि प्रत्येक प्रमुख प्रबंधकीय कार्मिक (Key Managerial Personnel - KMP), जो किसी अनुबंध (Contract) या व्यवस्था (Arrangement), अथवा प्रस्तावित अनुबंध या व्यवस्था में, जिसे कंपनी द्वारा या कंपनी की ओर से किया गया हो या किया जाना प्रस्तावित हो, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संबंधित या हितधारक (Interested) हो, वह अपने हित अथवा संबंध की प्रकृति का पूर्ण विवरण कंपनी को प्रकट करेगा।आगे यह भी प्रावधान है कि यदि अनुबंध या व्यवस्था प्रस्तावित (Proposed) हो, तो संबंधित प्रकटीकरण (Disclosure) उस बोर्ड बैठक से पहले या उसी बैठक में किया जाएगा, जिसमें पहली बार उस अनुबंध या व्यवस्था पर विचार किया जा रहा हो। यदि उस बैठक की तिथि पर संबंधित प्रमुख प्रबंधकीय कार्मिक का उसमें कोई हित या संबंध नहीं था, तो जैसे ही वह उसमें संबंधित या हितधारक बनता है, उसके पश्चात आयोजित होने वाली पहली बोर्ड बैठक में या उससे पहले यह प्रकटीकरण करना अनिवार्य होगा।अन्य किसी अनुबंध या व्यवस्था के मामले में, आवश्यक प्रकटीकरण उस पहली बोर्ड बैठक में या उससे पूर्व किया जाएगा, जो प्रमुख प्रबंधकीय कार्मिक के उस अनुबंध या व्यवस्था में संबंधित या हितधारक बनने के बाद आयोजित की जाए।

5.2 संबंधित पक्ष लेन-देन का अनुमोदन

 

5.2.1 लेखा परीक्षा समिति का पूर्व अनुमोदन

 

कंपनी के सभी संबंधित पक्ष लेन-देन (Related Party Transactions) के लिए लेखा परीक्षा समिति (Audit Committee) का पूर्व अनुमोदन आवश्यक होगा। यह अनुमोदन समिति की बैठक में अथवा परिपत्र प्रस्ताव (Resolution by Circulation) के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है।लेखा परीक्षा समिति का कोई भी सदस्य, जिसका किसी संबंधित पक्ष लेन-देन में प्रत्यक्ष या संभावित हित (Potential Interest) हो, उस संबंधित लेन-देन पर विचार किए जाने के दौरान बैठक में उपस्थित नहीं रहेगा। 

लेखा परीक्षा समिति (Audit Committee) की स्वीकृति निम्नलिखित प्रकार से प्राप्त की जाएगी:

 

(क) सभी संबंधित पक्ष लेन-देन (Related Party Transactions) पूर्व अनुमोदन के लिए लेखा परीक्षा समिति के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे, चाहे वे कंपनी के व्यवसाय के सामान्य क्रम (Ordinary Course of Business) में किए गए हों और/या आर्म्स लेंथ (Arm's Length) के आधार पर हों या नहीं। 

(ख) यदि कंपनी ने किसी संबंधित पक्ष (Related Party) के साथ ऐसा मास्टर एग्रीमेंट (Master Agreement) किया है, जिसमें प्रत्येक लेन-देन का स्वरूप, मूल्य निर्धारण का आधार (Pricing Basis), लोन/भुगतान की शर्तें (Credit Terms) आदि का स्पष्ट उल्लेख हो, तो ऐसे मास्टर एग्रीमेंट के लिए लेखा परीक्षा समिति द्वारा एक बार दिया गया पूर्व अनुमोदन पर्याप्त माना जाएगा। इसके पश्चात समिति केवल ऐसे मास्टर एग्रीमेंट के अंतर्गत किए गए लेन-देन का संज्ञान (Note) लेगी तथा पुनः अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होगी, जब तक कि मास्टर एग्रीमेंट की शर्तों में कोई परिवर्तन न किया जाए। 

लेखा परीक्षा समिति (Audit Committee) कंपनी द्वारा प्रस्तावित संबंधित पक्ष लेन-देन (Related Party Transactions) के लिए निम्नलिखित शर्तों के अधीन सामूहिक पूर्व-अनुमोदन (Omnibus Approval) प्रदान कर सकती है:

 

(क) लेखा परीक्षा समिति, निदेशक मंडल (Board of Directors) की स्वीकृति प्राप्त करने के पश्चात, कंपनी की संबंधित पक्ष लेन-देन नीति (Related Party Transactions Policy) के अनुरूप सामूहिक पूर्व-अनुमोदन (Omnibus Approval) प्रदान करने के मानदंड (Criteria) निर्धारित करेगी। ऐसा अनुमोदन केवल उन लेन-देन पर लागू होगा जिनकी प्रकृति आवर्ती (Repetitive) हो। 

(ख) सामूहिक पूर्व-अनुमोदन (Omnibus Approval) प्रदान करने के मानदंडों में निम्नलिखित शामिल होंगे:

 

  • • एक वित्तीय वर्ष में सामूहिक पूर्व-अनुमोदन (Omnibus Route) के अंतर्गत अनुमत सभी लेन-देन का कुल अधिकतम मूल्य।
  • • प्रत्येक व्यक्तिगत लेन-देन के लिए अनुमत अधिकतम मूल्य।
  • • सामूहिक पूर्व-अनुमोदन प्राप्त करते समय लेखा परीक्षा समिति के समक्ष किए जाने वाले प्रकटीकरण (Disclosures) की सीमा एवं प्रक्रिया।
  • • लेखा परीक्षा समिति द्वारा, अपनी आवश्यकता के अनुसार निर्धारित अंतराल पर, प्रत्येक सामूहिक पूर्व-अनुमोदन (Omnibus Approval) के अंतर्गत कंपनी द्वारा किए गए संबंधित पक्ष लेन-देन की समीक्षा।
    • ऐसे लेन-देन, जिन्हें लेखा परीक्षा समिति द्वारा सामूहिक पूर्व-अनुमोदन (Omnibus Approval) के अंतर्गत स्वीकृत नहीं किया जा सकता।
     
    सामूहिक पूर्व-अनुमोदन के मानदंड निर्धारित करते समय लेखा परीक्षा समिति निम्नलिखित बातों पर विचार करेगी:

(i) लेन-देन की आवर्ती (Repetitive) प्रकृति, चाहे वह पूर्व में हुई हो अथवा भविष्य में होने की संभावना हो।

(ii) सामूहिक पूर्व-अनुमोदन (Omnibus Approval) की आवश्यकता का औचित्य (Justification)।

(ग) लेखा परीक्षा समिति स्वयं यह सुनिश्चित करेगी कि सामूहिक पूर्व-अनुमोदन (Omnibus Approval) की वास्तविक आवश्यकता है तथा ऐसा अनुमोदन कंपनी के सर्वोत्तम हित में है।

(घ) सामूहिक पूर्व-अनुमोदन (Omnibus Approval) में निम्नलिखित विवरण स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट होंगे: (i) संबंधित पक्ष/पक्षों का नाम, (ii) लेन-देन की प्रकृति एवं अवधि, (iii) किए जा सकने वाले लेन-देन की अधिकतम राशि, (iv) सांकेतिक आधार मूल्य (Indicative Base Price) / वर्तमान अनुबंधित मूल्य (Current Contracted Price) तथा यदि लागू हो तो मूल्य परिवर्तन (Price Variation) का सूत्र, और (v) अन्य ऐसी शर्तें जिन्हें लेखा परीक्षा समिति उपयुक्त समझे।

(ङ) बशर्ते कि जहाँ किसी संबंधित पक्ष लेन-देन (Related Party Transaction) की आवश्यकता का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता हो तथा उपर्युक्त विवरण उपलब्ध न हों, वहाँ लेखा परीक्षा समिति ऐसे लेन-देन के लिए सामूहिक पूर्व-अनुमोदन (Omnibus Approval) प्रदान कर सकती है, बशर्ते कि प्रत्येक लेन-देन का मूल्य ₹1 करोड़ (एक करोड़ रुपये) से अधिक न हो।

 

लेखा परीक्षा समिति (Audit Committee), अपनी आवश्यकता के अनुसार निर्धारित अंतराल पर, कंपनी द्वारा प्रत्येक सामूहिक पूर्व-अनुमोदन (Omnibus Approval) के अंतर्गत किए गए संबंधित पक्ष लेन-देन (Related Party Transactions) के विवरण की समीक्षा करेगी। 

ऐसा सामूहिक पूर्व-अनुमोदन (Omnibus Approval) अधिकतम एक वित्तीय वर्ष की अवधि तक ही वैध रहेगा तथा एक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पश्चात इसके लिए नया अनुमोदन (Fresh Approval) प्राप्त करना अनिवार्य होगा।



धारा 5.2.1 के सामान्य प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, कंपनी के उपक्रम (Undertaking) की बिक्री अथवा उसके निपटान (Disposal) से संबंधित किसी भी लेन-देन के लिए सामूहिक पूर्व-अनुमोदन (Omnibus Approval) प्रदान नहीं किया जाएगा।
 

5.2.2. अधिनियम के अंतर्गत निदेशक मंडल का पूर्व अनुमोदन

 

अधिनियम की धारा 188 के अंतर्गत आने वाले संबंधित पक्षों (Related Parties) के साथ किए जाने वाले ऐसे सभी लेन-देन, जो कंपनी के व्यवसाय के सामान्य क्रम (Ordinary Course of Business) में नहीं हैं और/या आर्म्स लेंथ (Arm's Length) के आधार पर नहीं किए गए हैं, उनके लिए निदेशक मंडल (Board of Directors) का पूर्व अनुमोदन आवश्यक होगा। 

यदि कोई निदेशक (Director) किसी संबंधित पक्ष (Related Party) के साथ किए गए किसी अनुबंध (Contract) या व्यवस्था (Arrangement) में हितधारक (Interested) हो, तो वह उस अनुबंध या व्यवस्था से संबंधित प्रस्ताव (Resolution) पर विचार-विमर्श के दौरान बैठक में उपस्थित नहीं रहेगा। 

5.2.3 शेयरधारकों की स्वीकृति संबंधी आवश्यकताएँ

 

यदि संबंधित पक्षों (Related Parties) के साथ किए जाने वाले निम्नलिखित लेन-देन अधिनियम में निर्धारित सीमा (Threshold Limits) से अधिक होने की संभावना रखते हैं, तो ऐसे लेन-देन के लिए निदेशक मंडल (Board of Directors) तथा कंपनी के शेयरधारकों (Shareholders) दोनों का पूर्व अनुमोदन आवश्यक होगा: 

(क) ऐसा लेन-देन जो व्यवसाय के सामान्य क्रम (Ordinary Course of Business) में न हो, किंतु आर्म्स लेंथ (Arm's Length) के आधार पर किया गया हो; अथवा

(ख) ऐसा लेन-देन जो व्यवसाय के सामान्य क्रम में किया गया हो, किंतु आर्म्स लेंथ (Arm's Length) के आधार पर न किया गया हो; अथवा
(ग) ऐसा लेन-देन जो न तो व्यवसाय के सामान्य क्रम में किया गया हो और न ही आर्म्स लेंथ (Arm's Length) के आधार पर किया गया हो।


यदि कंपनी का कोई सदस्य (Member), अधिनियम के अंतर्गत विचाराधीन किसी अनुबंध (Contract) या व्यवस्था (Arrangement) के संदर्भ में संबंधित पक्ष (Related Party) है, तो वह उस प्रस्ताव (Resolution) पर मतदान करने का पात्र नहीं होगा।

 

यदि किसी निदेशक (Director) या अन्य कर्मचारी द्वारा निदेशक मंडल (Board) की पूर्व स्वीकृति अथवा सामान्य सभा (General Meeting) में पारित प्रस्ताव द्वारा अनुमोदन प्राप्त किए बिना कोई अनुबंध (Contract) या व्यवस्था (Arrangement) की जाती है तथा उसे उस अनुबंध या व्यवस्था की तिथि से तीन माह के भीतर निदेशक मंडल अथवा, जहाँ लागू हो, शेयरधारकों द्वारा अनुमोदित (Ratify) नहीं किया जाता, तो ऐसा अनुबंध या व्यवस्था निदेशक मंडल के विकल्प (Option) पर निरस्त (Voidable) की जा सकेगी। यदि ऐसा अनुबंध या व्यवस्था किसी निदेशक के संबंधित पक्ष (Related Party) के साथ की गई हो अथवा किसी अन्य निदेशक द्वारा अधिकृत (Authorized) की गई हो, तो संबंधित निदेशक कंपनी को हुई किसी भी हानि की प्रतिपूर्ति (Indemnify) करने के लिए उत्तरदायी होंगे। 

6. कार्यक्षेत्र / सीमाएँ

 

यदि इस नीति के प्रावधानों तथा कंपनी अधिनियम, 2013 अथवा किसी अन्य लागू वैधानिक अधिनियम (Statutory Enactment) या नियमों के प्रावधानों के बीच कोई विरोधाभास (Conflict) उत्पन्न होता है, तो ऐसी स्थिति में कंपनी अधिनियम, 2013 अथवा संबंधित वैधानिक अधिनियमों एवं नियमों के प्रावधान इस नीति पर प्रभावी (Prevail) होंगे। 

7. प्रकटीकरण

 

यह नीति कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित (Hosted) की जाएगी।कंपनी द्वारा किए गए प्रत्येक संबंधित पक्ष लेन-देन (Related Party Transaction) का उल्लेख निदेशक मंडल की रिपोर्ट (Board's Report) में किया जाएगा।कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत बनाए जाने वाले अनुबंधों के रजिस्टर (Register of Contracts) में आवश्यक प्रविष्टियाँ विधिवत दर्ज की जाएँगी।


अंतिम अद्यतन: 11.05.2017

Last updated on 11.05.2017